फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया01
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*🥀 फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया 🥀*
*🏮 पोस्ट 01*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*हिल्म हो तो ऐसा*
नबिय्ये करीम ﷺ की बारगाह में क़बूले इस्लाम के लिये लोग जूक दर जूक हाज़िर हुवा करते । एक दिन यमनी बादशाहों की औलाद से हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ वफ़्द की सूरत में बारगाहे रिसालत ﷺ में क़बूले इस्लाम के लिये हाज़िर हुवे तो इन्हें सहाबए किराम رِضْوَانُ اللّٰهِ تَعَالٰی عَلَیْھِمْ اَجْمَعِیْن ने बताया कि नबिय्ये करीम ﷺ ने तीन दिन पहले ही तुम्हारे आने की बिशारत इरशाद फ़रमा दी थी। नबिय्ये करीम ﷺ ने इन पर बेहद शफ़्क़त फ़रमाई ,इन के लिये अपनी चादर मुबारक बिछा दी ,अपने करीब बिठाया ,मिम्बरे अक्दस पर इन के लिये तारीफ़ी कलिमात इरशाद फ़रमाए बरकत की दुआ फ़रमाई और इन के क़ियाम के लिये मकान की निशान देही का काम एक कुरैशी नौजवान के सिपुर्द फ़रमाया ( इत्तिफ़ाक़ से येह कुरैशी नौजवान भी एक सरदारे मक्का का फ़रज़न्द था लेकिन दर्सगाहे नबुव्वत से फैज़याब होने और सोहबते मुस्तफ़ा से अख़्लाक़ व आदाब सीखने की बरकत से इस के मिज़ाज में ज़र्रा बराबर भी सरदारों वाली बात न थी ) नबिय्ये करीम ﷺ का हुक्म पाते ही वोह नौजवान फ़ौरन हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के हमराह चल दिया । हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ऊंटनी पर सुवार थे जब कि वोह कुरैशी नौजवान साथ साथ पैदल चल रहा था । चूंकि गर्मी शदीद थी इस लिये कुछ देर पैदल चलने के बाद उस कुरैशी नौजवान ने हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ से कहा : “गर्मी बहुत शदीद है ,अब तो मेरे पाउं अन्दर से भी जलने लगे हैं। आप मुझे अपने पीछे सुवार कर लीजिये।"
हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने साफ़ इन्कार कर दिया । उस कुरैशी नौजवान ने कहा : कम अज़ कम अपने जूते ही पहनने के लिये दे दीजिये ताकि मैं गर्मी से बच सकू। हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने कहा : तुम उन लोगों में से नहीं हो जो बादशाहों का लिबास पहन सकें । तुम्हारे लिये इतना ही काफ़ी है कि मेरी ऊंटनी के साए में चलते रहो ।" येह सुन कर उस कुरैशी नौजवान ने निहायत तहम्मुल का मुजाहरा किया और ज़बान से भी जवाबी कारवाई न की । वक्त गुज़रता गया और वोह कुरैशी नौजवान पूरे मुल्के शाम का गवर्नर बन गया । एक बार हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ उसी कुरैशी नौजवान के पास आए जो कि अब गवर्नर बन चुका था।
तो वोह कुरैशी नौजवान आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के साथ निहायत एहतिराम से पेश आया और माज़ी के उस वाकिए का बदला लेने के बजाए हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ को अपने साथ तख्त पर बिठाया और फ़रमाया : मेरा तख्त बेहतर है या आप की ऊंटनी की कोहान ?
हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने कहा : “ऐ अमीरुल मोमिनीन ! मैं उस वक्त नया नया मुसलमान हुवा था और जाहिलिय्यत का रवाज वोही था जो मैं ने किया । अब अल्लाह ने हमें इस्लाम से सरफ़राज़ फ़रमाया है और आप ने जो कुछ किया वोही इस्लाम का तरीका है।"
हज़रते सय्यिदुना वाइल बिन हुजर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ उस कुरैशी नौजवान के रवय्ये से इस कदर मुतअस्सिर हुवे कि आप ने फ़रमाया : काश मैं ने इन्हें अपने आगे सुवार किया होता !
*आप जानते हैं कि तक्लीफ़ बरदाश्त करने के बा वुजूद हुस्ने सुलूक से पेश आने वाले येह बुर्दबार कुरैशी नौजवान कौन थे ?*
येह नबिय्ये करीम ﷺ के जलीलुल कद्र सहाबी और कातिबे वय हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ थे । इस वाक़िए में हमारे लिये दर्स है कि अल्लाह और उस के रसूल ﷺ की रिज़ा के लिये अफ्वो दर गुज़र से काम लें और हर एक के साथ महब्बत भरा सुलूक करने की कोशिश करें।
*📚 फैज़ाने अमीरे मुआविया-13*
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