फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया03

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 *🥀 फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया 🥀* 



*🏮 पोस्ट 03*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ 
*वालिदैन का तआरुफ और कबूले इस्लाम* 
हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के वालिद हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ़्यान और वालिदा हज़रते सय्यिदतुना हिन्द رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْھُمَا ने फ़हे मक्का ( 8 हिजरी मुताबिक़ 629 ईसवी ) के रोज़ सरकारे दो आलम ﷺ के दस्ते हक़ परस्त पर इस्लाम कबूल किया ।
*सय्यिदुना अबू सुफ्यान की कुरबानियां* 
हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के वालिद हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ़्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ क़बीलए कुरैश की शाख बनू उमय्या की अहम तरीन शख्सिय्यत थे येही वज्ह है कि अबू जह्न के ग़ज़वए बद्र में कत्ल होने के बाद तमाम कबाइल की मुत्तफ़िका राए से आप सरदारे मक्का मुन्तख़ब हुवे । फ़तहे मक्का के दिन आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने इस्लाम कबूल किया और इसी रोज़ नबिय्ये करीम ﷺ ने हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ़्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के घर को *"दारुल अमान"* या'नी अम्न का घर करार दे कर आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ को खुसूसी इम्तियाज़ से नवाज़ा। 
        हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ़्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने इस्लाम कबूल करने के बाद अपनी तमाम तर कोशिशें दीने इस्लाम की सर बुलन्दी में सर्फ फ़रमाई । इस दौरान आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने बहुत कुरबानियां दीं और अपनी जुरअत व बहादुरी का अमली मुजाहरा फ़रमाया यहां तक कि अपनी दोनों आंखें राहे खुदा में कुरबान कर दीं । चुनान्चे, 
   जब हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ़्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ग़ज़वए हुनैन में हाज़िर हुवे तो नबिय्ये करीम ﷺ ने आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ को माले गनीमत से सौ ऊंट और चालीस ऊकिया अता फ़रमाए और आप के दोनों फ़रज़न्द हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया और हज़रते सय्यिदुना यज़ीद बिन अबी सुफ़्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْھُمَا को भी इतना ही अता फ़रमाया । ग़ज़वए ताइफ़ में भी आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ ने शिर्कत की और इस में आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ की एक आंख शहीद हुई ,आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ की दूसरी आंख जंगे यरमूक में शहीद हुई । याद रहे जंगे यरमूक के सिपह सालार हज़रते सय्यिदुना अबू सुफ्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ के फ़रज़न्द हज़रते सय्यिदुना यज़ीद बिन अबी सुफ्यान رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ थे।
*(येह यज़ीदे पलीद के चचा थे ,वोह बदबख़्त था लेकिन वालिद और चचा खुशबख़्त थे)* 
दोनों आंखों का राहे खुदा में शहीद हो जाना येह किस क़दर अज़मत की बात है लेकिन येह तो आप رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْهُ की अज़मत का ज़ाती पहलू है आप के मकामो मर्तबे को पहचानने के लिये आप के अले खाना के अज़ीम किरदार को मुलाहज़ा फ़रमाइये।

*_📚 फैज़ाने अमीरे मुआविया-19_*



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