फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया07
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*🥀 फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया 🥀*
*🏮 पोस्ट 07*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*_सय्यिदुना अमीरे मुआविया की जवानी और जमानए जाहिलिय्यत_*
हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया रदियल्लाहु तआला अन्हु की विलादत हुजूर ﷺ के ए'लाने नबुव्वत से पांच साल पहले मक्कए मुकर्रमा में हुई इस हिसाब से ब वक्ते हिजरत आप रदियल्लाहु तआला अन्हु की उम्र 18 साल थी और आप जवान थे ,लेकिन सरदारे मक्का के घर में तरबिय्यत पाने और कुफ़्फ़ारे मक्का के दरमियान रहने के बा वुजूद इस्लाम के ख़िलाफ़ होने वाली साज़िशों और जंगों में आप की शुमूलिय्यत मन्कूल नहीं ,या'नी ज़मानए जाहिलिय्यत में आप रदियल्लाहु तआला अन्हु का दामन ईजाए मुस्लिम के बदनुमा दाग से पाको साफ़ रहा और यकीनन येह अल्लाह तआला का आप पर करम था।
हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया रदियल्लाहु तआला अन्हु जब छोटे थे तो मुशरिकीने मक्का ने आप रदियल्लाहु तआला अन्हु के सामने हज़रते सय्यिदुना खुबैब रदियल्लाहु तआला अन्हु को तख्ते दार पर खड़ा किया तो आप रदियल्लाहु तआला अन्हु ने अले मक्का के लिये बद दुआ की।
_हज़रते सय्यिदुना अमीरे मुआविया रदियल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते हैं :-_ मुझे मेरे बाप ने ज़मीन पर लिटा दिया क्यूंकि उन का ख़याल था कि अगर ज़मीन पर लेट जाएं तो बद दुआ का असर नहीं होता । उस बद दुआ से हज़रते सुफ्यान रदियल्लाहु तआला अन्ह पर एक इज़तिराबी कैफ़िय्यत तारी हो गई ,मुझ पर उस बद दुआ का येह असर हुवा कि कई सालों तक मेरी शोहरत ख़त्म रही। कहते हैं कि जितने आदमी भी सूली पर चढ़ाते वक्त मौजूद थे एक साल के अन्दर अन्दर सब मर खप गए।
हमारे आका,मक्की मदनी मुस्तफा ﷺ से ज़ाहिर होने वाले मो'जिज़ात और सहाबए किराम की ज़ात से सादिर होने वाली बरकात मज़हबे इस्लाम की हक्कानिय्यत वाज़ेह करने के लिये काफ़ी थीं ,मगर दुश्मनाने इस्लाम सब कुछ देखते और जानते बूझते हुवे भी बुग्ज व अदावत के सबब ईमान न लाते थे ,लेकिन जिन लोगों को अल्लाह तआला ने कल्बे सलीम की ने'मत से नवाज़ा था वोह हिदायत का असर क़बूल करते थे और ईमान की ने'मत से सरफ़राज़ होते थे।
सय्यिदुना अमीरे मुआविया रदियल्लाहु तआला अन्हु भी उन्हीं खुश नसीब लोगों में से थे। सय्यिदुना खुबैब रदियल्लाहु तआला अन्हु की बे मिसाल कुरबानी और उन की बद दुआ की कबूलिय्यत को आप रदियल्लाहु तआला अन्हु ने मुलाहज़ा फ़रमाया ,नीज़ प्यारे आका ﷺ की मक्की ज़िन्दगी आप रदियल्लाहु तआला अन्हु के सामने गुज़री थी ,इस के इलावा आप की बहन उम्मुल मोमिनीन हज़रते सय्यिदतुना हबीबा रदियल्लाहु तआला अन्हा का अवाइले इस्लाम में हबशा की तरफ़ हिजरत करना और बा'दे अज़ां नबिय्ये करीम ﷺ के निकाह में आना ,येह वोह तमाम चीजें थीं जिस के सबब आप रदियल्लाहु तआला अन्हु के दिल में कुफ्र से नफ़रत और इस्लाम की महब्बत पैदा हुई ,गालिबन येही वोह अस्बाब थे जिन की वज्ह से आप रदियल्लाहु तआला अन्हु इस्लाम के ख़िलाफ़ होने वाले इक़्दामात व जंगो जिदाल में शरीक न हुवे और फिर अपने इस्लाम को फ़हे मक्का के रोज़ ज़ाहिर फ़रमाया जब आप रदियल्लाहु तआला अन्हु के वालिदैन के साथ साथ मक्के वाले भी इस्लाम ले आए थे।
*_📚 फैज़ाने अमीरे मुआविया-30_*
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